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चंद्रग्रहण की रात, क्या करें और क्या नहीं, जानिये इससे जुड़ी हर खास बात

नवाबस्ट्रीट न्यूज़ डेस्क: सूर्य ग्रहण के बाद अब चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. सूर्य ग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सका था, लेकिन चंद्रग्रहण को संपूर्ण भारत में देखा जा सकेगा. इसके पहले पिछले वर्ष 28 जुलाई 2018 को भी चंद्रग्रहण दिखाई दिया था. हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार चंद्र ग्रहण आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में लग रहा है. यह चंद्रग्रहण खंडग्रास चंद्र ग्रहण कहा जा रहा है. बता दें कि गुरु पूर्णिमा को लगातार दूसरी बार चंद्रग्रहण होने जा रहा हैं.

चंद्र ग्रहण 16 जुलाई और 17 जुलाई के बीच यानी आज रात 1 बजकर 32 मिनट से शुरू होगा और 4 बजकर 30 मिनट तक चलेगा. इस बार चंद्र ग्रहण का समय 3 घंटे का होगा. ग्रहण से जुड़ी कई सारी भ्रांतियां हैं, जिन्हें लेकर मन में संकोच होता है. ऐसे में हम आपको बता रहे हैं ग्रहण से जुड़ी कुछ खास बातें…

क्या है ग्रहण ?
:- किसी खगोलीय पिंड का पूर्ण या आंशिक रूप से किसी अन्य पिंड से ढंक जाना या पीछे आ जाना ग्रहण कहलाता है. सूर्य प्रकाश पिंड हैं. पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है, चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता हैं. पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य तीनों जब एक सीध में आ जाते हैं तब ग्रहण होता है.

सूर्य ग्रहण
:-जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता हैं तब सूर्य ग्रहण होता है.

चंद्र ग्रहण
:-जब पृथ्वी  सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती हैं तब चंद्रग्रहण होता हैं. पृथ्वी जब चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की किरणों को रोकती हैं और उसमें अपनी ही छाया बनाती हैं तो चंद्र ग्रहण होता हैं.

सुतक या वेध  
:- सुतक सभी वर्णो में लगता हैं, सूर्य ग्रहण का सूतक चार प्रहर पूर्व से यानी 12 घंटे पहले से लग जाता है, जबकि चंद्र ग्रहण का वेध तीन प्रहर यानि 9 घंटे पहले से प्रारंभ हो जाता है. अबाल वृद्ध बालक रोगी इनके लिए डेढ़ प्रहर यानि साढे चार घंटे पूर्व वेध प्रारंभ हो जाता है.

ग्रहण काल में नहीं करना चाहिए भोजन  
:- ग्रहण काल में कीटाणु, जीवाणु अधिक मात्रा में फैलते हैं खाने पीने के पदार्था में वे फैलते हैं इसलिए भोजन नहीं करना चाहिए, पका हुआ नहीं खाना चाहिए. कच्चे पदार्थों कुशा छोड़ने से जल में कुशा छोड़ने से जीवाणु कुशा में एकत्रित हो जाते हैं पात्रो में अग्नि डालकर स्नान करने से शरीर में उष्मा का प्रभाव बढ़े और भीतर बाहर के किटाणु नष्ट हो जाते हैं.
प्रोफेसर टारिंस्टन ने अनुसंधान कर बताया कि ग्रहण समय मनुष्य के पेट की पाचन शक्ति कमजोर होती हैं जिससे शारिरिक मानसिक हानि पहुंचती हैं.

ग्रहण काल में क्या करें ?
:- ग्रहण के वेध काल में तथा ग्रहण काल में भी भोजन नहीं करना चाहिए. देवी भागवत के अनुसार सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण के समय जो मनुष्य जितने अन्न के दाने खाते हैं उतने वर्षा तक अरूतुंद नरक में वास करता हैं और उदर रोगी, गुल्मरोगी , काना तथा दंतहीन होता हैं.

ग्रहण काल में क्या ना करें ?
कोई भी शुभ काम या नया कार्य नहीं करना चाहिए. ग्रहण समय में सोने से रोगी, लघुशंका से दरिद्र, स्त्री प्रसंग से सुअर तथा उबटन लगाने से कोढ़ी होता है. ग्रहण काल में तेल लगाना, भोजन करना, जल पीना, मल मूत्र त्यागना, बाल काटना, मंजन करना, रति क्रिया करना मना है. पत्ते, तिनके, फूल, लकड़ी नहीं तोड़ना चाहिए.

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