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मोदी सरकार के इस फैसले से नाराज हुई योगी सरकार, क्या बनेगी सहमति?

नवाबस्ट्रीट न्यूज़ डेस्क: देश की दो सरकारों में एक फैसले को लेकर बात बिगड़ती दिख रही है. खास बात ये है कि ये दोनों सरकारें बीजेपी की ही हैं. एक तरफ केन्द्र की मोदी सरकार है और दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार. मोदी और योगी की सरकारों के बीच जिस मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं वो है 17 ओबीसी जातियों को एससी वर्ग में शामिल करने वाला योगी का फैसला. इसी मुद्दे पर केन्द्र और राज्य सरकार के बीच एकराय नहीं बन सकी है.

दरअसल बीती 24 जून को उत्तर प्रदेश के सामाजिक कल्याण विभाग ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 29 मार्च, 2017 के फैसले के तहत 17 ओबीसी जातियों को एससी प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे. निर्देशों के अनुसार, जिन जातियों को जाति प्रमाण पत्र दिए जाने थे, उनमें कश्यप, राजभर, धीवर, बिंद, कुम्हार, केहर, केवट, निषाद, भार, मल्ला, प्रजापति, धीमर, बाथम, तुरहा, गोदिया मांझी और मछुआ जैसी जातियां शामिल हैं.

लेकिन योगी सरकार के इस फैसले को केन्द्र के सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने खारिज कर दिया था. बसपा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया था. जिस पर जवाब देते हुए केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय ने योगी सरकार के इस प्रावधान को खारिज कर दिया था. बीती 2 जुलाई को थावर चंद गहलोत ने संसद में इसकी जानकारी देते हुए इस प्रावधान को ‘असंवैधानिक’ बताया था.

हालांकि योगी सरकार अभी भी अपने स्टैंड से पीछे हटने को तैयार नहीं है. इकॉनोमिक टाइम्स की एक खबर के अनुसार, यूपी सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि ‘यह मामला अभी विचाराधीन है. समाज कल्याण विभाग द्वारा दिया गया फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अंतरिम आदेश के अनुसार ही है. यदि उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश को पढ़ेंगे तो यह खासतौर पर कहता है कि सभी जातियों को जाति प्रमाण पत्र इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार ही दिए जाएंगे. अब कोर्ट आगामी 12 जुलाई को इस मुद्दे पर सुनवाई करेगा.’

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