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प्रियंका गांधी की कुंडली में राजयोग, क्या हो जाएंगी मोदी को रोकने में कामयाब ?

कांग्रेस पार्टी की महासचिव बनने के साथ ही प्रियंका गांधी लगातार सियासी सुर्खियों में हैं. सक्रिय राजनीति में कदम रखते ही प्रियंका गाँधी को देश का सबसे प्रमुख राज्य उत्तर प्रदेश दिया गया. अब जबकि 6 चरण का चुनाव हो चुका है, नतीजे आने में सिर्फ एक चरण की वोटिंग रह गई है, तो प्रियंका गांधी को लेकर सब ये जानने को उत्सुक हैं कि वो पीएम मोदी का विजयरथ रोक पाती हैं या नहीं ?

कांग्रेस पार्टी का मानना है कि वह उनका तुरुप का पत्ता साबित होंगी और कांग्रेस के खोई प्रतिष्ठा को वापस दिलाएंगी. यह तो बात हुई राजनीतिक दांव की लेकिन क्या प्रियंका के सितारे भी इस बात पर मुहर लगाते हैं, जानने के लिए आइए देखते हैं प्रियंका गांधी की कुंडली का विवेचन करते हैं –

प्रियंका गांधी का जन्म 12 जनवरी 1972 को शाम 5 बजकर 5 मिनट पर नई दिल्ली में हुआ. मिथुन लग्न की कुंडली है. राशि वृश्चिक है, बुद्ध के प्रभाव से जातक गुणी वक्ता और बुद्धिमान होता है वही नीच का चंद्रमा है लेकिन उसका स्वामी मंगल केंद्र में बैठकर राजयोग बना रहा है.

इस कुंडली में राजनीति के कारक ग्रह गुरु केंद्र में है, देव गुरु बृहस्पति ग्रहों के राजा सूर्य के साथ अपने ही भाव में लग्नेश बुद्ध के साथ केन्द्रधिपत्य राजयोग का निर्माण कर रहे है जिसके कारण प्रियंका गांधी के प्रति कांग्रेस कार्यकर्ताओ का एक नैसर्गिक लगाव है.

शनि की अगर हम बात करे तो शनि मिथुन लग्न की कुंडली में भाग्येश होकर योगकारक होता है और इस कुंडली में कुम्भ राशि में शनि के मित्र शुक्र बैठे है लेकिन शनि देव खुद 12 वे भाव में विराजमान है और यही कारण है की जीवन के 32 वे वर्ष में नहीं बल्कि जीवन के 47 वे वर्ष में इनका राजनीति में आना हुआ है.

वर्तमान में प्रियंका गांधी की शुक्र की महादशा में शनि की अंतरदशा चल रही है. जो बहुत उत्तम नहीं कहा जा सकता, परंतु शनि जन्मकुंडली भाग्याधिपति होने के कारण उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के खोए हुए जनाधार को निश्चित रूप से वापसी की ओर ले जायेगा. अर्थात् यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि कांग्रेस आई के लिए प्रियंका गांधी का राजनीतिक प्रवेश अवश्य लाभकारी सिद्ध होगा. परंतु इन्हें गंभीर रूप से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का सामना भी करना पड़ेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मकालिक राशि भी वृश्चिक ही है जो कि प्रियंका गांधी की है. ऐसे में राजनीति के मैदान में पीएम मोदी को राहुल गांधी से अधिक चुनौती प्रियंका गांधी से मिलेगी. यद्यपि दोनों की ही साढ़ेसाती चल रही है, जिसके फलस्वरूप मोदी जी उत्तर प्रदेश में न केवल पूर्व से बहुत कम सफलता प्राप्त करेंगे, अपितु प्रियंका गांधी के योगकारी शनि एवं बृहस्पति की उत्तम अवस्था के कारण भाजपा को एवं अन्य पार्टियों को गंभीर रूप से हानि होगी.

सितंबर 2019 तक प्रियंका गांधी को स्वयं के परिवार के उपर जहां राजनीतिक आघात का मुकाबला करना होगा, वहीं शासन-प्रशासन की तरफ से भी संकट का सामना भी करना पड़ सकता है. इस बीच प्रियंका गांधी एवं उनके परिवार, विशेष रूप से पति को शासन सत्ता का खासा विरोध झेलना पड़ेगा. लेकिन सितंबर 2019 के बाद बुध की अंतरदशा इन्हें भारतीय राजनीति के ध्रुव तारे की तरह प्रकाशित करेगी.

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