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अगर आपके भी SBI अकाउंट में है 1 लाख रुपये, तो होने वाला है बड़ा फायदा

आम तौर पर सार्वजनिक क्षेत्र यानी सरकारी बैंकों में बचत खातों में जमा रकम पर कोई विशेष ब्याज नहीं मिलता है। इसीलिए लोग सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉज़िट-FD) सहित अनेक निवेश मार्ग अपनाते हैं, परंतु देश के सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने एक ऐसा निर्णय किया है जिससे उसके ग्राहकों को बचत खाते में जमा रकम से भी बड़ा फायदा मिलेगा, बशर्ते कि आपके खाते में न्यूनतम 1 लाख रुपया होना चाहिए। यदि यह शर्त पूरी होती है, तो आपको अन्य बैंकों की बचत खाता ब्याज दरों से अधिक ब्याज मिलेगा।

दरअसल एसबीआई ने अपने ग्राहकों के बचत खातों और होम लोन ब्याज दरों को भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई-RBI) के रेपो रेट से जोड़ने का निर्णय किया है। यह निर्णय 1 जुलाई से लागू होने जा रहा है, जिससे एसबीआई के 42 करोड़ ग्राहकों को तत्काल लाभ होगा।

एसबीआई के प्रबंधन ने शुक्रवार शाम को ही एक ऐसा ऐलान किया है, जो एसबीआई के ग्राहकों के लिये अच्छी खबर लेकर आया है। दरअसल एसबीआई के अनुसार देश का यह सबसे बड़ा बैंक 1 जुलाई-2019 से होम लोन को रिज़र्व बैंक के रेपो रेट से जोड़ देगा। अर्थात् 1 जुलाई से एसबीआई अपने ग्राहकों को रेपो रेट से जुड़ा होम लोन ऑफर करेगा। ऐसा करने से एसबीआई के होम लोन की ब्याज दर पूरी तरह से रेपो रेट पर आधारित होगी और भारतीय रिज़र्व बैंक के रेपो रेट में बदलाव करने के साथ ही होम लोन की ब्याज दरों में भी बदलाव होगा, जिसका होम लोन लेने वाले ग्राहकों को सीधा लाभ होगा।

होम लोन लेने वालों को फायदा

एसबीआई के देश में 42 करोड़ ग्राहक हैं और यह बैंक सार्वजनिक क्षेत्र का सबसे बड़ा बैंक है। एसबीआई की ओर से शुक्रवार शाम को एक वक्तव्य जारी करके कहा गया है कि अगले महीने जुलाई-2019 से एसबीआई के होम लोन की ब्याज दर पूरी तरह से रेपो रेट पर आधारित हो जाएगी। और सरल शब्दों में कहें तो भारतीय रिज़र्व बैंक जब-जब रेपो रेट में बदलाव करेगा, तब-तब एसबीआई के होम लोन की ब्याज दरें भी बदलेंगी। आरबीआई प्रति वर्ष 6 बार अर्थात् हर दो महीने में अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है और इसी बैठक में रेपो रेट घटाने या बढ़ाने का निर्णय किया जाता है।

उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने गुरुवार को इस साल की तीसरी बैठक में लगातार रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की है। इसी के साथ रेपो रेट 6.25 प्रतिशत से घटकर 5.75 प्रतिशत तक नीचे आ गया है। आरबीआई के रेपो रेट घटाने से वाणिज्यिक बैंकों के लिये रिज़र्व बैंक से लिया जाने वाला धन सस्ता हो जाता है और जब यही धन वह बैंक लोन के रूप में अपने ग्राहकों को बाँटते हैं तो लोन पर लिये जाने वाले ब्याज में कटौती करने की स्थिति में होते हैं। हालाँकि यह बैंकों पर निर्भर करता है कि वह रेपो रेट में हुई कटौती का लाभ अपने ग्राहकों को दें या नहीं। इसीलिये रेपो रेट में लगातार तीसरी बार कटौती किये जाने के बावजूद अधिकांश बैंकों ने विविध लोन की ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है।

न्यूनतम् 1 लाख जमा पर भी फायदा

एसबीआई इससे पहले भी अपने ग्राहकों को रेपो रेट में कटौती का लाभ देता आया है। उसने रेपो रेट में कटौती का लाभ अपने ग्राहकों तक तुरंत पहुँचाने के लिये 1 मई से जमा रकम और लोन को सीधे तौर पर रेपो रेट से जोड़ दिया है। एसबीआई ग्राहकों के हित में ऐसा कदम उठाने वाला देश का पहला बैंक भी बन गया है। हालाँकि इस कदम का लाभ उन्हीं ग्राहकों को मिलेगा, जिनके खाते में कम से कम एक लाख रुपये की रकम जमा होगी।

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